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From Sanatan Hindu Dharma
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<center><strong>ॐ</strong>
 
<strong>धर्मो मातेव पुष्णानि धर्मः पाति पितेव च ।    धर्मः सखेव प्रीणाति धर्मः स्निह्यति बन्धुवत् ॥</strong>
 
<strong>धर्म माता की तरह हमें पुष्ट करता है, पिता की तरह हमारा रक्षण करता है, मित्र की तरह खुशी देता है, और संबंधियों की भाँति स्नेह देता है ।</strong></center>
 
 
<strong>स्नेही स्वजन,</strong>
 
हम सभी बहुत ही सौभाग्यशाली हैं कि हमें भारत भूमि पर जन्म लेने एवं हिन्दू या सनातन धर्मावलंबी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है ।
 
सनातन या हिंदू धर्म को हम संसार के प्राचीनतम धर्म के रूप में जानते हैं ।
 
हिन्दू धर्म के उद्भव के बारे में बहुत से अलग-अलग विचार हैं पर एक बात बहुत स्पष्ट है कि यह निश्चित तौर पर संसार या मानव सभ्यता का एक प्राचीनतम धर्म है।
 
इस धर्म को प्राचीनतम ग्रंथों, वेदों, पुराणों, उपनिषद और भी बहुत से अनमोल मार्गदर्शक शास्त्र एवं साहित्य मिले हैं।
 
कालान्तर में एवं विभिन्न सोचों एवं विचारों के चलते हिन्दू धर्म एवं इसकी पद्धतियों के बारे में इसकी बहुत सी मान्यताओं एवं आचार विचारों को अलग-अलग रूप में व्याखित किया गया और इन्हीं के साथ कुछ भ्रांतियों का जन्म भी स्वाभाविक रूप से हो गया। हिन्दू धर्म हर तरह से मानवता के सर्वांगीण विकास को पूरी तरह समर्पित है इस पर भी कोई विवाद नहीं है।
 
हमें अपने पौराणिक ग्रंथों के रूप में बहुत ही अनमोल निधियाँ मिली हुई है, इनमें से हो सकता है बहुत सी विलुप्त भी हो गई हो पर इनका बहुत का अनमोल खजाना अभी भी उपलब्ध है
 
हिन्दू धर्म को मानने एवं इसकी सेवा में लगे हुए अनगिनत धर्म गुरुओं,  व्यक्तियों एवं संस्थाओं ने अपने-अपने तरीके से  हिन्दू धर्म को लोगों तक पहुंचाने एवम् आगे बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है और देते रहेंगे।
 
सनातन या हिन्दू धर्म की जड़ों की गहराइयों का आकलन हम इसी बात से कर सकते हैं कि सैकड़ों वर्षों तक अन्य धर्मावलम्बियों एवं विदेशी ताकतों के  द्वारा कुचले जाने की कोशिशों के बावजूद सनातन या हिन्दू धर्म आज भी पूर्ण रूप से विश्व भर में करोड़ों लोगों की पूर्ण आस्था का केन्द्र बिन्दु है।
 
आधुनिक वैज्ञानिक तकनिकियों एवं साधनों से चलते एक बहुत अच्छा कार्य यह भी हो रहा  है कि हिन्दू धर्म की बहुत सी बातों को जो लोग पहले मिथक कहने से नहीं चूकते थे वो भी अब इस धर्म की गहराइयों को अब समझने एवं इन पर विश्वास करने लगे हैं। 
 
आधुनिक तकनीकों से  सारे उपलब्ध ग्रंथों का संकलन एवं इनकी कुछ हद तक सही व्याख्या करके इनको सही रूप में पूरे मानव समाज को उपलब्ध कराना अब सरल भी हुआ है।
 
काफी जानकार लोगों एवं कुछ संतों से विचार विमर्श के बाद हमने अपने हिंदू या सनातन धर्म के विभिन्न ग्रंथों, आचारों एवं विचारों का इंटरनेट  एवं अन्य तकनीकों के माध्यम से एक सम योजित, सामान्य एवं साधारण तरीके से एक जगह उपलब्ध कराने का सिद्धांत हमने मिलकर लिया है ।
 
काफी जानकार लोगों एवं कुछ संतों से विचार विमर्श के बाद हमने हिन्दू धर्म शोध संस्थान की शुरुआत करने का सिद्धांत हमने मिलकर लिया है ताकि वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों को हिंदू धर्म को समझने एवं मानने में सुविधा हो सके।
 
इन्हीं  प्रेरणा स्त्रोतों  साथ इस कार्य को आगे बढ़ाने हेतु हमने एक गैर राजनैतिक एवं गैर व्यवसायिक संस्था जिसका नाम – “<strong>हिन्दू धर्म शोध संस्थान</strong>”  एवं इसकी वेबसाइट https://www.HinduReligion.in होगी, इनकी स्थापना एवं कार्य को मूर्तरूप देने हेतु एक ट्रस्ट के रूप में इसका पंजीकृत कार्यालय वृन्दावन में रखते हुए पंजीकरण किया गया है। एक पूर्ण रूप से पारदर्शक तरीके से इस संस्थान की एक ट्रस्ट के रूप स्थापना एवं संचालन का दृढ़ संकल्प लेते हुए  हम इस शुभ कार्य की शुरुआत करने जा रहे हैं।
 
आप निश्चित तौर पर यह समझ सकते हैं कि यह अपने आप में एक बहुत बड़ा और जिम्मेदारी पूर्ण कार्य है और इसे कुछ समय में या जल्द ही पूरा नहीं किया जा सकता है।  सही पूछें तो यह अपने आप में कभी पूरा या सम्पूर्ण होने वाला कार्य नहीं है पर हम अपने सम्मिलित प्रयासों से इसे एक सही दिशा देते हुए आगे बढ़ा सकते हैं।
 
हम स्पष्ट तौर पर समझते हैं कि यह हम जैसे साधारण या सिर्फ कुछ व्यक्तियों के द्वारा पूरा किया जा सकने वाला कार्य नहीं है।
 
हाँ हमें यह विश्वास जरूर है कि समाज के सभी वर्गों एवं आप सभी के सहयोग से हम इस कार्य को क्रमशः एक बहुत अच्छे एवं सर्व उपयोगी प्रकल्प के रूप में स्थापित कर पायेंगे।
 
हमें आप सभी को बताते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि दिनांक १५.१०.२०२४ को ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हो गया है और अब हम ट्रस्ट के कार्यों को आगे बढ़ा सकेंगे।
 
 
 
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Consult the [https://www.mediawiki.org/wiki/Special:MyLanguage/Help:Contents User's Guide] for information on using the wiki software.
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Revision as of 11:43, 4 December 2024


हमारे बारे में | उद्देश्य | ट्रस्टी | सदस्यों के वर्ग | हमसे संपर्क करें | कैलेंडर 2025

धर्मो मातेव पुष्णानि धर्मः पाति पितेव च । धर्मः सखेव प्रीणाति धर्मः स्निह्यति बन्धुवत् ॥

धर्म माता की तरह हमें पुष्ट करता है, पिता की तरह हमारा रक्षण करता है, मित्र की तरह खुशी देता है, और संबंधियों की भाँति स्नेह देता है ।


स्नेही स्वजन,

हम सभी बहुत ही सौभाग्यशाली हैं कि हमें भारत भूमि पर जन्म लेने एवं हिन्दू या सनातन धर्मावलंबी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है ।

सनातन या हिंदू धर्म को हम संसार के प्राचीनतम धर्म के रूप में जानते हैं ।

हिन्दू धर्म के उद्भव के बारे में बहुत से अलग-अलग विचार हैं पर एक बात बहुत स्पष्ट है कि यह निश्चित तौर पर संसार या मानव सभ्यता का एक प्राचीनतम धर्म है।

इस धर्म को प्राचीनतम ग्रंथों, वेदों, पुराणों, उपनिषद और भी बहुत से अनमोल मार्गदर्शक शास्त्र एवं साहित्य मिले हैं।

कालान्तर में एवं विभिन्न सोचों एवं विचारों के चलते हिन्दू धर्म एवं इसकी पद्धतियों के बारे में इसकी बहुत सी मान्यताओं एवं आचार विचारों को अलग-अलग रूप में व्याखित किया गया और इन्हीं के साथ कुछ भ्रांतियों का जन्म भी स्वाभाविक रूप से हो गया। हिन्दू धर्म हर तरह से मानवता के सर्वांगीण विकास को पूरी तरह समर्पित है इस पर भी कोई विवाद नहीं है।

हमें अपने पौराणिक ग्रंथों के रूप में बहुत ही अनमोल निधियाँ मिली हुई है, इनमें से हो सकता है बहुत सी विलुप्त भी हो गई हो पर इनका बहुत का अनमोल खजाना अभी भी उपलब्ध है

हिन्दू धर्म को मानने एवं इसकी सेवा में लगे हुए अनगिनत धर्म गुरुओं, व्यक्तियों एवं संस्थाओं ने अपने-अपने तरीके से हिन्दू धर्म को लोगों तक पहुंचाने एवम् आगे बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है और देते रहेंगे।

सनातन या हिन्दू धर्म की जड़ों की गहराइयों का आकलन हम इसी बात से कर सकते हैं कि सैकड़ों वर्षों तक अन्य धर्मावलम्बियों एवं विदेशी ताकतों के द्वारा कुचले जाने की कोशिशों के बावजूद सनातन या हिन्दू धर्म आज भी पूर्ण रूप से विश्व भर में करोड़ों लोगों की पूर्ण आस्था का केन्द्र बिन्दु है।

आधुनिक वैज्ञानिक तकनिकियों एवं साधनों से चलते एक बहुत अच्छा कार्य यह भी हो रहा है कि हिन्दू धर्म की बहुत सी बातों को जो लोग पहले मिथक कहने से नहीं चूकते थे वो भी अब इस धर्म की गहराइयों को अब समझने एवं इन पर विश्वास करने लगे हैं।

आधुनिक तकनीकों से सारे उपलब्ध ग्रंथों का संकलन एवं इनकी कुछ हद तक सही व्याख्या करके इनको सही रूप में पूरे मानव समाज को उपलब्ध कराना अब सरल भी हुआ है।

काफी जानकार लोगों एवं कुछ संतों से विचार विमर्श के बाद हमने अपने हिंदू या सनातन धर्म के विभिन्न ग्रंथों, आचारों एवं विचारों का इंटरनेट एवं अन्य तकनीकों के माध्यम से एक सम योजित, सामान्य एवं साधारण तरीके से एक जगह उपलब्ध कराने का सिद्धांत हमने मिलकर लिया है ।

काफी जानकार लोगों एवं कुछ संतों से विचार विमर्श के बाद हमने हिन्दू धर्म शोध संस्थान की शुरुआत करने का सिद्धांत हमने मिलकर लिया है ताकि वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों को हिंदू धर्म को समझने एवं मानने में सुविधा हो सके।

इन्हीं प्रेरणा स्त्रोतों साथ इस कार्य को आगे बढ़ाने हेतु हमने एक गैर राजनैतिक एवं गैर व्यवसायिक संस्था जिसका नाम – “हिन्दू धर्म शोध संस्थान” एवं इसकी वेबसाइट https://www.HinduReligion.in होगी, इनकी स्थापना एवं कार्य को मूर्तरूप देने हेतु एक ट्रस्ट के रूप में इसका पंजीकृत कार्यालय वृन्दावन में रखते हुए पंजीकरण किया गया है। एक पूर्ण रूप से पारदर्शक तरीके से इस संस्थान की एक ट्रस्ट के रूप स्थापना एवं संचालन का दृढ़ संकल्प लेते हुए हम इस शुभ कार्य की शुरुआत करने जा रहे हैं।

आप निश्चित तौर पर यह समझ सकते हैं कि यह अपने आप में एक बहुत बड़ा और जिम्मेदारी पूर्ण कार्य है और इसे कुछ समय में या जल्द ही पूरा नहीं किया जा सकता है। सही पूछें तो यह अपने आप में कभी पूरा या सम्पूर्ण होने वाला कार्य नहीं है पर हम अपने सम्मिलित प्रयासों से इसे एक सही दिशा देते हुए आगे बढ़ा सकते हैं।

हम स्पष्ट तौर पर समझते हैं कि यह हम जैसे साधारण या सिर्फ कुछ व्यक्तियों के द्वारा पूरा किया जा सकने वाला कार्य नहीं है।

हाँ हमें यह विश्वास जरूर है कि समाज के सभी वर्गों एवं आप सभी के सहयोग से हम इस कार्य को क्रमशः एक बहुत अच्छे एवं सर्व उपयोगी प्रकल्प के रूप में स्थापित कर पायेंगे।

हमें आप सभी को बताते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि दिनांक १५.१०.२०२४ को ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हो गया है और अब हम ट्रस्ट के कार्यों को आगे बढ़ा सकेंगे।